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मुजफ्फरनगर दंगा 2013: 4 आरोपी सबूतों के अभाव में बरी, तोड़फोड़-लूट का था आरोप

नईम ने अपनी शिकायत में कहा था कि हमलावर बंदूकों और धारदार हथियारों से लैस थे और उन्होंने उस पर और उसके परिवार पर हमला किया।

प्रतीकात्मक तस्वीर

मुजफ्फरनगर: उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में साल 2013 में हुए दंगे के मामले कोर्ट ने बड़ा फैसला लिया है। इस मामले के चारों आरोपियों को एक स्थानीय अदालत ने सबूतों के अभाव में बरी कर दिया है। 28 सितंबर, 2013 को फुगाना गांव निवासी नईम और उसके दो भाइयों नदीम और शौकत ने फुगाना थाने में मामला दर्ज कर आरोप लगाया था कि आरोपी योगेंद्र, नितिन गुड्ड और विशाल सहित दर्जनों अन्य लोगों ने 8 सितंबर को उनके घर पर हमला किया था।

आरोपियों पर तोड़फोड़-लूट का आरोप

नईम ने अपनी शिकायत में कहा था कि हमलावर बंदूकों और धारदार हथियारों से लैस थे और उन्होंने उस पर और उसके परिवार पर हमला किया। उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने "हमारे घर में तोड़फोड़ की और 3 लाख रुपये से अधिक लूट लिए।" बचाव पक्ष के वकील सोहराब सिंह ने कहा, "शिकायतकर्ता और उसके दो भाई, जो इस मामले में गवाह थे, शत्रुतापूर्ण हो गए। इसलिए, न्यायाधीश बाबू राम की अदालत (अतिरिक्त जिला और सत्र न्यायाधीश अदालत -6) ने आरोपी को बरी कर दिया है।"

पिछले साल भी 20 लोग हुए थे बरी

यह पहली बार नहीं है जब किसी अदालत ने दंगों में हिंसा के आरोपियों को रिहा किया है। पिछले साल अक्टूबर में एक स्थानीय अदालत ने सबूतों के अभाव में 20 लोगों को बरी कर दिया था। उन पर एक व्यक्ति की हत्या करने और उसके घर को लूटने के बाद आग लगाने का आरोप लगाया गया था। दिसंबर में, पांच पुरुषों को इसी तरह के कारणों से बरी कर दिया गया था।

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