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गूगल डूडल ने स्टीफन हाकिंग की 80 वीं जयंती मनाई, जाने उनके बारे में विशेष बातें

स्टीफन हॉकिंग कई सिद्धांतों के बारे में दुनिया को बताया और समझाया। उन्होंने ब्रह्माण्ड के बारे में बहुत सारे रिसर्च किए हैं जिसके माध्यम से कई रहस्यों से पर्दा उठाया है।

नई दिल्लीः दिवंगत भौतिक विज्ञानी स्टीफन हॉकिंग को गूगल ने शनिवार को उनकी 80वीं जयंती पर डूडल बनाकर श्रद्धांजलि दी । ढाई मिनट के इस एनिमेटेड वीडियो में भौतिक विज्ञानी की अपनी कंप्यूटर जनित आवाज में उनके काम की रूपरेखा और भविष्य के लिए उम्मीद भरा संदेश शामिल है। तकनीकी क्षेत्र की दिगगज कंपनी एंडाडगेट ने उनके परिवार के साथ यह वीडियो डूडल बनाने के लिए काम किया है जो हमें उनके जीवन का एक संक्षिप्त परिचय देता है। इसके अलावा, गूगल ने हॉकिंग की मशहूर कंप्यूटर जनित आवाज का उपयोग उनके काम और उनके स्नातक होने के समय के अनुभवों को बताने के लिए किया है।

स्टीफन हॉकिंग


हॉकिंग का जन्म 1942 में इंग्लैंड के ऑक्सफोर्ड में हुआ था और वह हमेशा से ही ब्रह्मांड के रहस्यों को जानने के उत्सुक रहे थे। स्टीफन हॉकिंग जब 21 साल के तभी वो न्यूरोडीजेनेरेटिव बीमारी के शिकार हो गए थे और इस बीमारी की वजह से व्हीलचेयर पर आ गए। इस बीमारी के वजह से उनकी आवाज चली गई, लेकिन स्पीच-जनरेटिंग डिवाइस के जरिए वह बात करने लगे। उन्होंने कई सिद्धांतों के बारे में दुनिया को बताया और समझाया। उन्होंने ब्रह्माण्ड के बारे में बहुत सारे रिसर्च किए हैं जिसके माध्यम से कई रहस्यों से पर्दा उठाया है। इनमें बिंग बैंग और ब्लैक होल समेत कई थ्योरी शामिल हैं।
 

ब्लैक होल के बारे में पहले किसी को जानकारी नहीं थी, लेकिन स्टीफन हॉकिंग रहस्यमय पिंड के रहस्य से पर्दा उठाया। साल 1971 में पहले ब्लैक होल की खोज की गई थी। हॉकिंग ने इनके बारे में कई जानकारियां दी जिससे इनके बारे में जानने में मदद मिली। स्टीफन हॉकिंग ने साल 1974 में ब्लैक हॉल्स पर रिसर्च किया और उसकी थ्योरी मोड़ दी। इसकी वजह से वह विज्ञान की दुनिया के सेलिब्रिटी बन गए।

डूडल में, उपयोगकर्ता हॉकिंग की आवाज को ब्लैक होल पर उनके काम के बारे में बात करते हुए सुनेंगे । इसी क्षेत्र में उन्होंने सबसे अधिक काम किया था। वह हॉकिंग विकिरण सिद्धांत के लिए भी जाने जाते हैं जिसमें ब्लैक होल विकिरण उत्सर्जित करते हैं। उपयोगकर्ता उनकी आवाज को यह कहते हुए भी सुनेंगे कि कैसे वह अपने दिमाग में स्वतंत्र है, भले ही वह हिल नहीं सकते हैं। उनकी आवाज बताती है मैंने अपना जीवन अपने दिमाग के अंदर ब्रह्मांड की यात्रा करते हुए बिताया है ।
 

माना जाता है कि ब्लैक होल का विकिरण की व्याख्या महीन कणों से होती है। सामान्यतया अलग नहीं होने वाले सकारात्मक और ऋणात्मक कणों के जोड़े ब्लैक होल की सीमा पर अलग हो जाते हैं। स्टीफन हॉकिंग ने साल 1974 में इस पर रिसर्च किया जिसके बाद इस विकिरण को हॉकिंग विकिरण या हॉकिंग बेकनस्टीन विकिरण नाम दिया गया। हॉकिंग ने बताया है कि ब्लैक होल से तारों की तरह हमेशा विकिरणों का उत्सर्जन होता है। 


स्टीफन हॉकिंग के ब्लैक होल पर कई रिसर्च किए जिसके बाद भौतिकविदों के पास ब्रह्माण्ड की जो समझ थी उस पर फिर से विचार करना पड़ा। भौतिकविदों का मानना था कि एन्ट्रॉपी तंत्र के आयतन के साथ बढ़ती है। हॉकिंग की एंट्रॉपी और क्षेत्रफल के संबंधों की कड़ी ने हैरान वाला काम किया। स्टीफन हॉकिंग ने भौतिकविदों और ब्रह्माण्डविदों का नजरिया बदलकर रख दिया। इसके साथ ही उन्होंने आम लोगों की भी ब्लैक होल और अंतरिक्ष विज्ञान में रुचि को बढ़ा दिया। स्टीफन हॉकिंग वैज्ञानिकों के लिए एक प्रेरणा हैं। 

हॉकिंग ने अपने रिसर्च के बल पर कहा था कि दुनिया को भगवान ने नहीं रची है। उनका कहना था कि दुनिया भौतिक विज्ञान के नियमों का नतीजा है। दुनिया के महान वैज्ञानिकों में शामिल स्टीफन हॉकिंग ने 76 साल की उम्र में 14 मार्च 2018 को दुनिया को अलविदा कह दिया था। 

डॉक्टरों की भविष्यवाणी को किया झूठा साबित

न्यूरोडीजेनेरेटिव बीमारी की चपेट में इंसान के तंत्रिका तंत्र के काम न करने की वजह से शरीर की मूवमेंट बंद हो जाती है। स्टीफन हॉकिंग बीमारी की इलाज के लिए अस्पताल गए, तो डॉक्टरों ने कहा कि वह 2 साल तक ही जिंदा रह सकते हैं। लेकिन उन्होंने डॉक्टरों की भविष्यवाणी को गलत साबित किया और 76 साल तक जिंदा रहे। 

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