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ज्यादा तेजी से ठंडा हो रहा धरती का केंद्र, मंगल ग्रह बन जाएगी पृथ्वी

रिपोर्ट के अनुसार, कार्नेगी इंस्‍टीट्यूशन फॉर साइंस के ईटीएच प्रोफेसर मोतोहिको मुराकामी और उनके एक साथी ने रिसर्च की है जो में पब्‍ल‍िश्‍ड हुई है। इस रिसर्च के अनुसार धरती के अंदर का हिस्‍सा अपेक्षा से जल्‍द ठंडा हो रहा है।

नई दिल्ली:- एक अध्ययन में पाया गया है कि पृथ्वी का आंतरिक भाग उम्मीद से ज्यादा तेजी से ठंडा हो रहा है। इसका मतलब है कि हमारी धरती भी बुध और मंगल की तरह अनुमान से पहले निष्क्रिय हो जाएगी। ईटीएच ज्यूरिख के नेतृत्व में शोधकर्ताओं ने प्राथमिक खनिज ब्रिजमेनाइट के तापीय गुणों का अध्ययन किया है। शोधकर्ताओं की टीम ने एक माप प्रणाली विकसित की है जो पृथ्वी के अंदर मौजूद दबाव और तापमान की स्थिति के तहत लैब में ब्रिजमेनाइट की तापीय चालकता को मापती है। 

यह रिसर्च अर्थ एंड प्लैनेटरी साइंस लेटर्स जर्नल' में प्रकाशित हुई है। 4.5 अरब साल पहले, युवा पृथ्वी की सतह पर अत्यधिक तापमान था और यह मैग्मा के गहरे महासागर से ढकी हुई थी। लाखों सालों में पृथ्वी की सतह ठंडी हो गई और एक सतह में बदल गई। अभी तक इस सवाल का जवाब नहीं मिल पाया है कि पृथ्वी इतनी तेजी से ठंडी कैसे हुई और शीतलन के लिए उपरोक्त गर्मी से चलने वाली प्रक्रियाओं को रुकने में कितना समय लग सकता है।



पृथ्वी के अंदर मौजूद दबाव और तापमान की स्थिति में  क्‍या बदलाव हो रहे हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, कार्नेगी इंस्‍टीट्यूशन फॉर साइंस के ईटीएच प्रोफेसर मोतोहिको मुराकामी और उनके एक साथी ने रिसर्च की है जो में पब्‍ल‍िश्‍ड हुई है। इस रिसर्च के अनुसार धरती के अंदर का हिस्‍सा अपेक्षा से जल्‍द ठंडा हो रहा है। ये कुछ ऐसा ही है जैसे बुध और मंगल ग्रह पर हुआ था जहां जीवन का नामोनिशान नहीं है। इस तरह धरती के ठंडी होने का लगा पता इन विशेषज्ञों ने एक माप प्रणाली विकसित की है जो प्रयोगशाला में ब्रिजमेनाइट की तापीय चालकता को मापने में सक्षम बनाती है । यह बताता है कि पृथ्वी के अंदर मौजूद दबाव और तापमान की स्थिति में  क्‍या बदलाव हो रहे हैं।
 

शोधकर्ताओं ने कहा  कि ये बदलाव ग्रह के ठंडा होने की ओर ले जा रहे हैं।

इस बदलाव से तेजी से ठंडा हो रहा है ग्रह इसमें सामने आया कि धरती के कोर से मेंटल में गर्मी का प्रवाह भी पहले की तुलना में अधिक है।अधिक ऊष्मा प्रवाह मेंटल संवहन को बढ़ाता है जिससे पृथ्वी की ठंडक बढ़ती है। शोधकर्ताओं ने कहा  कि ये बदलाव ग्रह के ठंडा होने की ओर ले जा रहे हैं।
 

गर्मी गई तो धरती का चुंबकीय क्षेत्र, गुरुत्वाकर्षण जैसी ताकतें खत्म हो जाएंगी। 

बुध और मंगल ग्रह पर हो चुका है ऐसा मुराकामी ने समझाया, "हमारे परिणाम हमें पृथ्वी की गतिशीलता के विकास पर एक नया दृष्टिकोण दे सकते हैं. वे सुझाव देते हैं कि पृथ्वी, अन्य चट्टानी ग्रहों बुध और मंगल की तरह ठंडा हो रहा है। हम अभी भी इस प्रकार की घटनाओं के बारे में पूरी तरह नहीं जानते हैं।
 

जितनी ज्यादा तेजी से कोर की गर्मी बाहरी परतों पर आएगी, धरती उतनी तेजी से केंद्र की गर्मी खोती चली जाएगी

हमारी धरती तेजी से पथरीले ग्रहों के जैसी होती जा रही है। ये बुध या मंगल ग्रह की तरह बन जाएगी। वह भी उम्मीद से ज्यादा गति से। एक नए रिसर्च में पता चला है कि धरती का केंद्र यानी गर्म मैग्मा वाला इलाका अपनी तय गति की तुलना में ज्यादा तेज ठंडा हो रहा है। अगर ऐसा हो रहा है तो वैज्ञानिकों को फिर से धरती की परतों और उनकी गणित, केमिस्ट्री, जियोलॉजी आदि सब फिर से पढ़नी पढ़ेगी। आइए समझते हैं असल में धरती के केंद्र में हो क्या रहा है? धरती के केंद्र के तेजी से ठंडा होने की प्रक्रिया को समझने के लिए वैज्ञानिक हमारे खूबसूरत ग्रह के कोर और मैंटल के बीच मौजूद खनिजों की थर्मल कंडक्टिविटी यानी ऊष्मीय चालकता की स्टडी कर रहे हैं। जितनी ज्यादा तेजी से कोर की गर्मी बाहरी परतों पर आएगी, धरती उतनी तेजी से केंद्र की गर्मी खोती चली जाएगी। गर्मी गई तो धरती का चुंबकीय क्षेत्र, गुरुत्वाकर्षण जैसी ताकतें खत्म हो जाएंगी। 
 

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