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बिहार में शराबबंदी : आए थे हरि-भजन को, ओटन लगे कपास

बिहार में शराब का बिकना कभी बंद ही नहीं हुआ क्योंकि पड़ोसी राज्यों-झारखंड, यूपी, बंगाल और पड़ोसी देश नेपाल से शराब की आमद को रोकना 'बिना मरे स्वर्ग जाने' जैसा ही लक्ष्य था।

पटना में दुल्हन के कमरे में पुलिस

नई दिल्ली : कभी-कभी अच्छे काम करना भी इंसान के लिए कई मुसीबतों का कारण बन जाता है। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जब राज्य में शराबबंदी कानून को लागू करने का फैसला किया होगा तो उन्होंने इसके बारे में गंभीरता से विचार करने की तकलीफ शायद नहीं उठाई होगी। इसके कारण नीतीश कुमार सरकार के सामने कई ऐसी समस्याएं खड़ी हो गईं हैं जिनको हल करने का उनको कोई उपाय नहीं सूझ रहा है। नीतीश कुमार ने सोचा होगा कि राज्य में शराबबंदी लागू करके वे बुद्ध और महावीर की कतार में खड़े हो जाएंगे। जिन्होंने समाज को एक दिशा दिखाई थी। जबकि नतीजे इसके ठीक उल्टे देखने को मिल रहे हैं। 

शराबबंदी बहुत कठिन लक्ष्य

सबसे पहले तो बिहार में शराब का बिकना कभी रुका ही नहीं क्योंकि पड़ोसी राज्यों-झारखंड, यूपी, बंगाल और पड़ोसी देश नेपाल से शराब की आमद को रोकना बिना मरे स्वर्ग जाने जैसा ही लक्ष्य था। खैर नीतीश कुमार को लगा होगा कि शायद वे इस कठिन काम को करके इतिहास में अपना नाम सुनहरे अक्षरों में लिखवा सकते हैं। शराबबंदी के लागू होते ही राज्य के कुछ पड़ोसी लोग पड़ोसी राज्यों में शराब टूरिज्म पर जाने लगे। जब इससे भी बात नहीं बनी तो राज्य में कच्ची और अवैध शराब बिकने लगी। जिसको पीकर के हाल ही में 36 लोगों की मौत हो गई। इसके बाद तो नीतीश कुमार की सुशासन कुमार की छवि दरकने लगी। इसे कायम रखने के लिए नीतीश कुमार ने पुलिस को खुला छोड़ दिया। 

पुलिस हुई बेलगाम

पुलिस को तो मानो इसी मौके का इंतजार था। पटना के रामकृष्‍णा नगर थाना स्थित एक विवाह भवन बोधि विहार होटल में पुलिस शराब की तलाशी के नाम पर घुस गई। पुलिस को लगा कि बारातियों को नीतीश कुमार के इकबाल का खौफ है, इसलिए उनके पास तो शराब शायद नहीं मिलेगी, लेकिन दुल्हन जरूर अपनी शादी को इंज्वाय करने के लिए दारू पार्टी करेगी। दरोगा जी ने अपराध को रोकने के इस जानदार मौके को छोड़ना मुनासिब नहीं समझा और दुल्हन के कमरे में भी घुसकर तलाशी लेने लगे। जब किसी ने महिला पुलिस के बगैर इस वारदात को अंजाम देने पर सवाल उठाए तो दरोगा जी ने अपना रटा-रटाया पहाड़ा सुना दिया कि ये सब  ऊपर के आदेश का पालन' करने के लिए करना पड़ रहा है। वरना वे को खुद शादी-बियाह में आनंद मनाने के पक्ष में हैं। अब तो दरोगा जी के फरिश्तों को ही पता होगा कि वे ऊपर के आदेश का पालन कर रहे थे या ऊपरी कमाई करने के मौके को यूं ही बर्बाद नहीं करना चाहते थे। 

राजद को मिला मौका

नीतीश कुमार की शराबबंदी ने ऐसे लोगों को भी बोलने का मौका दिया है जिन्होंने कभी किसी भी नियम-कानून को ज्यादा भाव नहीं दिया। चारा खपाने के मामले में सजा पा चुके लालू प्रसाद यादव ने कहा कि मैंने तो पहले ही बता दिया था शराबबंदी चलेगी नहीं। उनका कहना वाजिब है। जब पूरे देश में परिवार नियोजन के लिए नसबंदी अभियान चलाया जा रहा था तो उसके विरोध में लालू प्रसाद ने जो परिवार बढ़ाओ सत्याग्रह किया उसकी मिसाल मिलना कठिन है। ऐसे नेता और उनके समर्थकों के रहते शराबबंदी का सफल होना दुनिया के आठवें अजूबे से कम नहीं होगा।  

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नीतीश की इमेज हो सकती है खराब 

नीतीश कुमार ने वैसे तो इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है लेकिन उनको यह साधारण बात समझ में नहीं आई कि किसी नट को ज्यादा टाइट देने से उसकी चूड़ी मिस हो जाती है और नुकसान हो सकता है। नीतीश कुमार भी कुछ ऐसे ही काम बिहार में शराबबंदी के नाम पर कर रहे हैं। केवल रविवार को पटना में 33 आरोपियों को शराब पीने के लिए जेल भेजा गया है, जिनमें 2 डॉक्टर, 6 सॉफ्टवेयर इंजीनियर और होटल कर्मी भी शामिल हैं। पुलिस को नीतीश कुमार ने शराबबंदी लागू करने के लिए जिम्मेदार बना दिया है। नीतीश कुमार वैसे भी पुलिस के सभी रूपों से भली-भांति परिचित हैं। जेपी आंदोलन में उन्होंने पुलिस की भलमनसाहत का कुछ अनुभव जरूर पाया होगा। नीतीश कुमार ने वैसे तो कुछ कामधाम करके सुशासन बाबू का नाम पाया है। फिलहाल तो अब इस बात का खतरा बढ़ने लगा है कि शराबबंदी में जनता उनके काम को कहीं दुशासन के कारनामे न बताने लगे। देखते जाइए, तमाशा जारी है...

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