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कुछ तो उपाय करो राहुल भाई, अब कांग्रेस-दुर्दशा और ना देखी जाई

पिछले 7 साल में कांग्रेस और उसके रहनुमा ना जाने किस उम्मीद में मोदी के कांग्रेस मुक्त भारत के दावे को हकीकत में बदलने के लिए जी-तोड़ कोशिशों में लगे हैं।

कांग्रेस सांसद राहुल गांधी.

नई दिल्ली: देश को कांग्रेस मुक्त करने का दावा जब भाजपा के नरेंद्र मोदी ने किया था तो उनके भक्तों ने भी इसे शायद ही ज्यादा गंभीरता से लेने की गलती की थी। लोगों को लगता था कि मोदी अपनी जीत से कुछ ज्यादा ही उत्साहित हो गए हैं। लेकिन पिछले 7 साल में कांग्रेस और उसके रहनुमा ना जाने किस उम्मीद में मोदी के दावे को हकीकत में बदलने के लिए जी-तोड़ कोशिशों में लगे हैं। 

पंजाब में नवजोत सिंह सिद्धू ने अपनी अंधाधुंध बयानबाजी और धुआंधार हरकतों से कैप्टन अमरिंदर सिंह की कप्तानी ले ली। जब कांग्रेस ने चरणजीत सिंह चन्नी को पंजाब का नया कप्तान बनाया तो सिद्धू का धैर्य जवाब दे गया। पंजाब का कप्तान बनने की सिद्धू की तमन्ना अब उनके काबू से बाहर हो चुकी है। 

कैप्टन ने जैसे ही पाला बदलने की तैयारी की,सिद्धू ने मौका ताड़ लिया और कांग्रेस के राज्य अध्यक्ष की कुर्सी छोड़कर शहीदी चोला पहनने को तैयार हो गए। उधर कैप्टन ने पहले ही सिद्धू को इमरान और बाजवा का यार बताकर राष्ट्रवादियों के यहां अपना वजन बढ़ा लिया। जबकि सिद्धू भाजपा के यहां अपने सारे पैंतरे आजमाने के बाद ही कांग्रेस में पहुंचे थे। राहुल, प्रियंका और सोनिया जब तक मामले की गंभीरता को समझते तब तक सिद्धू ने मामला काफी हद तक निपटा दिया। 

पंजाब का ही पड़ोसी राजस्थान भी इस मामले में पीछे नहीं रहने वाला है। वहां पर भी सचिन पायलट और अशोक गहलोत के बीच जोर आजमाइश जारी है। ये अलग बात है कि राजस्थान की संस्कृति को निभाते हुए दोनों गुट लक्ष्मण रेखा को पार नहीं कर रहे हैं। अन्यथा वहां भी पंजाब की तरह ‘खुला खेल’ शुरू हो चुका होता।
 
कांग्रेस के राज वाले एक सूबे छत्तीसगढ़ का हाल तो और भी विचित्र है। वहां एक स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव का दावा है कि भूपेश बघेल को इस शर्त पर मुख्यमंत्री की गद्दी दी गई थी कि ढाई साल बाद वे ईमानदारी से CM का पद छोड़ देंगे। ऐसा ही एक समझौता यूपी में कभी भाजपा और बसपा के बीच भी हुआ था। उसका क्या अंजाम हुआ था, ये सभी को पता है। अब भूपेश बघेल गद्दी छोड़ने को राजी नहीं और सिंहदेव CM की गद्दी पर बैठने का हठ छोड़ने को तैयार नहीं। मामला बहुत रोचक मोड़ पर है। 

 

इसी बीच कांग्रेस के पुराने नेता कपिल सिब्बल ने फिर से पार्टी में अध्यक्ष के चुनाव का पुराना राग छेड़ दिया। इससे कांग्रेस के वर्कर्स इतने नाराज हो गए कि उनके घर पर चढ़ गए। उनका मानना है कि एक पूर्णकालिक अध्यक्ष की मांग करके सिब्बल ने लोकतांत्रिक पार्टी के उसूलों के खिलाफ काम किया है। कांग्रेस हमेशा ही असहमति को सम्मान देती रही है।

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सिब्बल जैसे लोगों के चलते कांग्रेस अपनी परंपरा तो छोड़ नहीं देगी। वैसे भी सिब्बल इतनी बातें इसलिए कर पा रहे हैं कि कांग्रेस एक लोकतांत्रिक पार्टी है। लगता है कि राहुल गांधी ने दिग्विजय सिंह की सलाह पर अमल करने का फैसला कर लिया है। दिग्विजय सिंह का कहना है कि अगर राजनीति की दुनिया में टिके रहना चाहते हैं, तो अपनी चमड़ी मोटी कर लेनी चाहिए। देखते जाइए तमाशा जारी है...  

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