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जावेद अख्तर ने कहा, महिलाओं के घर में रहने के तालिबानी फरमान का विरोध करें मुस्लिम संस्थाएं

मशहूर शायर और पटकथा लेखक जावेद अख्तर ने कहा कि “मुझे उम्मीद है कि सभी महत्वपूर्ण मुस्लिम संगठन इसकी निंदा करेंगे। क्योंकि यह उनके धर्म के नाम पर किया जा रहा है।”

जावेद अख्तर ने कहा, महिलाओं के घर में रहने के तालिबानी फरमान का विरोध करें मुस्लिम संस्थाएं

नई दिल्ली: मशहूर शायर और पटकथा लेखक जावेद अख्तर ने सभी मुस्लिम संस्थाओं से अफगानिस्तान में तालिबान की सरकार के महिलाओं को कामकाज छोड़कर घरों में रहने के फरमान को विरोध करने को कहा है। उन्होंने कहा कि “मुझे उम्मीद है कि सभी महत्वपूर्ण मुस्लिम संगठन इसकी निंदा करेंगे। क्योंकि यह उनके धर्म के नाम पर किया जा रहा है।”  

जावेद अख्तर ने एक ट्विट करके पूछा कि “वे सभी कहां हैं जो कल तक ट्रिपल तलाक के बचाव में चिल्ला रहे थे।”
अपने विचारों को बिना किसी लाग-लपेट के जनता के सामने पेश करने के लिए मशबूर जावेद अख्तर ने कहा कि अल-जजीरा ने खबर दी है कि काबुल के मेयर ने सभी कामकाजी महिलाओं को घर पर रहने का आदेश दिया है।

 

इससे कुछ दिन पहले जावेद अख्तर ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की तुलना तालिबान से करके विवाद खड़ा कर दिया था। उनके इस बयान के बाद भारतीय जनता पार्टी और संघ समर्थक लोगों में आक्रोश था। इसे देखते हुए महाराष्ट्र की सरकार ने जावेद अख्तर की सुरक्षा बढ़ा दी थी। जुहू पुलिस ने उनके घर के बाहर कुछ पुलिसकर्मियों को तैनात किया है। महाराष्ट्र में एनसीपी और कांग्रेस के साथ सत्ता में साझेदारी कर रही शिवसेना ने भी कहा था कि अख्तर का तालिबान के साथ आरएसएस की तुलना करना पूरी तरह गलत है।   

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हालांकि उनके घर के बाहर कोई विरोध प्रदर्शन नहीं हुआ, न ही उनके खिलाफ कोई शिकायत दर्ज कराने गया। अख्तर ने भी पुलिस सुरक्षा की मांग नहीं की थी, लेकिन सावधानी के लिए पुलिस ऐसा किया था। अख्तर ने अपने बयान में कहा था कि पूरी दुनिया के दक्षिणपंथी लोगों में वैचारिक समानता है और तालिबान और RSS दोनों ही फासिस्ट विचारधारा वाले हैं। उन्होंने कहा कि तालिबान हथियारों से मजबूत है लेकिन वैचारिक दृष्टि और विचारधारा के मामले में दोनों बराबर हैं।    

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जावेद अख्तर ने उन भारतीय मुसलमानों की भी आलोचना की थी जो तालिबान के सत्ता में वापस लौटने का समर्थन कर रहे हैं। अख्तर के इस बयान के बाद भाजपा के घाटकोपर वेस्ट के एमएलए राम कदम ने धमकी दी थी कि वह जावेद अख्तर की कोई भी फिल्म तब तक रिलीज नहीं होने देंगे, जब तक कि वह अपने इस बयान को लेकर माफी नहीं मांग लेते।   

जबकि शिवसेना ने भी कहा था कि अख्तर का बयान पूरी तरह गलत है। आरएसएस और तालिबान की तुलना करने वाले बयान पर शिवसेना ने कहा कि कैसे कोई हिंदू राष्ट्र का पक्ष लेने वाले की तुलना तालिबानी विचारधारा से कर सकता है? मराठा के मुखपत्र सामना में लिखे एक लेख में कहा गया था कि शिव सेना जावेद अख्तर के इस बयान से पूरी तरह असहमत है।

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