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कंगना के हिसाब से भीख में मिलती है देशों को आजादी, साधु भी समर्थन में उतरे

एक फिल्म में रानी लक्ष्मीबाई का किरदार अदा करने वालों को भी लगता है कि आजादी हमें भीख में मिल गई है। कुछ लोगों को लगता है कि भारत में जो कुछ अच्छा हुआ है वह 2014 के बाद ही हुआ है।

नई दिल्ली: कुछ लोगों को लगता है कि भारत को आजादी बहुत आसानी से बिना किसी कोशिश के मिल गई है। ऐसे लोग कोई एक दिन में पैदा नहीं हुए हैं। जब देश आजाद हुआ तब भी कुछ लोगों ने ये नारा लगाना शुरू कर दिया कि “यह आजादी झूठी है”। उनका कहना था कि जब तक हर गरीब के घर में रोटी नहीं है, तब तक ये आजादी झूठी है। दूसरी ओर एक ऐसी विचारधारा के लोग हैं, जिनका कहना था कि 800 साल की मुसलमानों की गुलामी और डेढ़ सौ साल की ईसाई धर्म की गुलामी के बाद यह हिंदू राज हमें मिला है। भारत को हिंदू राष्ट्र होना चाहिए, यहां तो भगवा फहरना चाहिए। ये लोग देश के तिरंगे झंडे को भी नहीं मानते थे। एक फिल्म में रानी लक्ष्मीबाई का किरदार अदा करने वालों को भी लगता है कि यह सब हमें भीख में मिल गया। शायद 75 साल में आजादी हासिल करने वाले लोगों के संघर्ष को देखने वाली पीढ़ी अब खत्म हो गई है। कुछ भोले भगतों को लोगों को लगता है कि भारत में जो कुछ अच्छा हुआ है वह 2014 के बाद ही हुआ है। 

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