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अयोध्या में पंचकोसी परिक्रमा शुरू, आस्था पर हर पग न्योछावर; जानें अध्यात्मिक महत्व

देवोत्थान एकादशी के पावन मौके पर राम नगरी अयोध्या में पंचकोसी परिक्रमा शुरू हो गई है। यह परिक्रमा रामजन्मभूमि परिसर के पांच कोस के भीतर की जाती है।

फोटोः आदित्य मेहरोत्रा

अयोध्याः राम नगरी अयोध्या भारत की दिव्य आस्था का केंद्र है। जबसे राम मंदिर बनने का कोर्ट द्वारा आदेश आया है तबसे हर रोज हजारों श्रद्धालुओ का अयोध्या की पावन नगरी में आगम होना शुरू हो गया है। आज से अयोध्या में पंचकोसी परिक्रमा शुरू हो गई है। यह पावन पर्व हिंदू मान्यता के अनुसार कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि के दिन पड़ता है। पंच कोसी परिक्रमा को करने के लिए अयोध्या में लाखों श्रद्धालु आते हैं। यह परिक्रमा राम मंदिर के पांच कोस के भीतर की जाती है। इस दिन को देवउठनी, देवउठानी, देवोत्थान एकादशी भी कहते हैं। 

2 वर्ष से अयोध्या में करोना के कारण बाधित थी परिक्रमा मेला। इस वर्ष परिक्रमा मेला में श्रद्धालुओं  को लेकर प्रशासन ने सभी को कोविड नियमों के पालने करने के लिए कहा है। परिक्रमा पथ पर श्रद्धालुओं के लिए व्यापक इंतजाम किए गए हैं। आज प्रातः 8:40 पर अयोध्या में श्रद्धालुओं ने पंच कोसी परिक्रमा की शुरुआत जय श्री राम के नाम के साथ कर दी। पंच कोसी परिक्रमा 15 नवंबर को समाप्त होगी। इससे पूर्व अयोध्या में 14 कोसी परिक्रमा हुई थी।

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नंगे पाव की जाती पचंकोसी परिक्रमा

अयोध्या में की जानी वाली पंचकोसी परिक्रमा करने के लिए लोखों श्रद्धालु आते हैं। यह परिक्रमा राम जन्मभूमि परिसर के 15 किलोमीटर के भीतर की जाती है। इस परिक्रमा को श्रद्धालु नंगे पांव करते है। हिंदू धर्म में मान्यता है कि यह मानव शरीर पांच भौतिक तत्वों से मिलकर बना है। मनुष्य को जन्म से लेकर मृत्यु तक कई सारे कष्टों को भोगना पड़ता है, जो पीड़ादायक होता है। जो भी अयोध्या में आकर कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को देवोत्थान एकादशी के दिन पंचकोसी परिक्रमा करता है। उसे भौतिक शरीर से छुटकारा मिलता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

इस दिन तुलसी विवाह का विशेष महत्व

देवोत्थान एकादशी के दिन से सारे मांगलिक कार्य जैसे विवाह संस्कार, धार्मिक अनुष्ठान आदि शुरू हो जाते हैं। हिंदू धर्म में माना जाता है कि इस दिन भगवान विष्णु शेषनाग की शैय्या से अपने निद्रा अवस्था से जागते हैं। इसलिए इस दिन को देवोत्थान एकादशी भी कहते हैं, इस दिन व्रत रखने का बड़ा महत्व बताया जाता है। वैष्णव संप्रदाय के लोग आज के दिन भगवान शालिग्राम और तिलसी जी का विवाह संस्कार करते हैं। इस दिन हिंदू धर्म के लोग तुलसी के पौधे की पूजा-अर्चना भी करते हैं। इस दिन दान देने से सभी शुभ फलों की प्राप्ती भी होती है।  

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