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12 साल बाद गुरु का कुंभ राशि में गोचर, जानें किन 5 राशियों पर पड़ेगा इसका प्रभाव

12 साल बाद गुरु कुंभ राशि में आए गए हैं, इससे पहले वो अपनी नीच राशि मकर में थे। अपने गोचर के साथ वो हर राशि में अब अपना अलग-अलग प्रभाव देंगे।

देव गुरु बृहस्पति का कुंभ राशि में गोचर

नई दिल्लीः हिंदू धर्म में ज्योतिष को एक ऐसी विद्या कही गई है जिसके सही अध्यन से हम भविष्य में होने वाली घटनाओं का आकलन कर सकते हैं। वेदों के 6 अंग बताए गए हैं, जिनमें ज्योतिष भी आता है। आज हम आपको देव गुरु बृहस्पति के गोचर के बारे में बताने जा रहे हैं। करीब 12 साल बाद आज देव गुरु अपनी नीच राशि मकर से निकल कर कुंभ राशि में आ गए हैं। गुरु बृहस्पति एक राशि में एक साल तक के लिए  भ्रमण करते हैं, फिर अगली राशि में गोचर कर जाते हैं।

 ज्योतिष में गुरु बृहस्पति को शुभ कारक ग्रह माना जाता है, यह ग्रह शिक्षा, भाग्य, धन- धान्य, सनतान, धर्म आदि का कारक माना जाता है। गुरु बृहस्पति ग्रहों में सबसे बड़ा ग्रह है और इसकी तीन दृष्टियां  होती जो क्रमशः 5,7 और 9 हैं। कुंडली में देव गुरु बृहस्पति जिस भी घर या ग्रह को देख लें उसके परिणाम को शुभ कर देते हैं और उस घर के भाव की वृद्धि करते हैं। गुरु बृहस्पति ने आज कुंभ राशि में प्रवेश किया है जिसके चलते प्रत्येक राशि पर इसका प्रभाव पड़ेगा जयोतिष में इसी बात से जुड़ा एक श्लोक भी बताया गया है।

ग्रहाधीनं जगत्सर्वं ग्रहाधीनाः नरावराः। कालज्ञानं ग्रहाधीनं ग्रहाः कर्मफलप्रदाः।।

अर्थः ग्रहों के अधीन ही यह सम्पूर्ण संसार है। ग्रहों का प्रभाव चर से अचर जीव को पृथ्वी पर जन्म से भोगना होता है। कालका ज्ञान( समय की गढ़ना) भी ग्रहोंके अधीन है और ग्रह ही कर्मों के फलों को देने वाले होते हैं।

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इन राशियों का आधिप्तय करते हैं  गुरु बृहस्पति

देव गुरु बृहस्पति की अपनी खुद की दो राशियां हैं धनु और मीन। कर्क में गुरु उच्च के  और मकर में नीच के माने जाते हैं। 

जानें 5 राशियों पर पड़ने वाले प्रभाव

मेषः इस राशि में गुरु योग कारक होते हैं। मेष राशि वालों के लिए गुरु लाभ का रास्ता खोलेंगे इन राशि वालों के आए के नए श्रोत बन सकते हैं, क्योंकि कुंभ इस भाव की 11वीं राशि है और 11वें भाव से लाभ और आए के श्रोत का आकलन किया जाता है।

वृषः इस राशि के जातकों के लिए कुंभ 10वीं राशि हुई जिससे नौकरी और पद प्रतिष्ठा
में वृद्धि के अच्छे योग बनने की संभावना बन सकती है। दशम भाव से नौकरी, पिता, पद प्रतिष्ठा आदि का आकलन किया जाता है।

मिथुनः इस राशि में कुंभ 9वें भाव की राशि है। गुरु के गोचर से इन राशि के जातकों को भाग्य का साथ मिलने की संभावना है।

कर्कः इन राशि वोलों के लिए कुंभ 8वी राशि है। इस राशि के जातकों को किसी भी  प्रकार के आकस्मिक लाभ होने की संभावनाएं बन सकती हैं। 

सिंहः अगर इस राशि के जातक किसी भी तरह की कंपटीशन की तैयारी कर रहे हैं तो ये इनके लिए सबसे उत्तम समय हैं क्योंकि छटे भाव में बेठा गुरु हर प्रकार की चुनौतियों से जीत दिलाता है।

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