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पाकिस्तान ने जमीन के रास्ते अफगानिस्तान को भारतीय मदद भेजने की अनुमति दी

अफगानिस्तान में तालिबान के शासन में जंग, सूखे और कोविड-19 के कारण लाखों लोगों को भुखमरी का सामना करना पड़ रहा है। देश की केवल 5% आबादी के पास खाने के लिए पर्याप्त राशन है।

एक अफगान शरणार्थी शिविर

नई दिल्ली : पाकिस्तान के मंत्रिमंडल ने मंगलवार को भारत को पड़ोसी अफगानिस्तान को गेहूं की मदद भेजने के लिए अपने जमीनी रास्ते का उपयोग करने की अनुमति दी है। अफगानिस्तान में सूखा पड़ने के कारण इस समय लाखों लोग कड़ाके की ठंड के रूप में भुखमरी का सामना कर रहे हैं। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री कार्यालय ने एक बयान में कहा कि इस्लामाबाद भी अफगानिस्तान को सहायता भेजेगा, जिसमें 50,000 मीट्रिक टन गेहूं शामिल है। जो भारत से अफगानिस्तान को भेजे जाने वाले गेहूं के बराबर है।

पाकिस्तान के सूचना मंत्री फवाद चौधरी ने प्रधानमंत्री इमरान खान के साथ बैठक के बाद एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, "हमने इस 50,000 टन गेहूं को जमीनी रास्ते से जाने को मंजूरी दी है, जिसे भारत अफगानिस्तान भेजना चाहता है। हमें लगता है कि मानवीय आधार पर अफगानिस्तान के लोगों की किसी भी तरह से मदद की जानी चाहिए।"

इलाज के लिए भारत गए मरीजों को वापसी की सुविधा 

जबकि भारत ने घोषणा पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। पाकिस्तान लंबे समय से भारत को जमीनी रास्ते से अफगानिस्तान से वाणिज्यिक या अन्य परिवहन संपर्क से रोकता रहा है। 1947 में भारत से अलग होने के बाद पाकिस्तान ने भारत से तीन युद्ध लड़े हैं। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान के कार्यालय ने अपने बयान में कहा कि इस्लामाबाद काबुल को 5 अरब रुपये (28.65 मिलियन डॉलर) की मानवीय सहायता भेजेगा और इसमें 50,000 मीट्रिक टन गेहूं, आपातकालीन चिकित्सा आपूर्ति, शीतकालीन आश्रय और अन्य सामानों की आपूर्ति शामिल होंगी। बयान में ये भी कहा गया है कि पाकिस्तान इलाज के लिए भारत भेजे गए अफगान मरीजों की वापसी की सुविधा देगा।

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केवल 5% आबादी के पास खाने के लिए पर्याप्त राशन

गौरतलब है कि अफगानिस्तान में तालिबान के शासन के तहत जंग, सूखे और कोविड-19 के कारण लाखों लोगों को भुखमरी का सामना करना पड़ रहा है। संयुक्त राष्ट्र की एक संस्था विश्व खाद्य कार्यक्रम (World Food Programme-WFP) ने कहा है कि चार साल में दूसरे सूखे के बाद से अफगानिस्तान में गेहूं की लगभग 40% फसल बर्बाद होने के बाद से खाद्य पदार्थों की कीमतें बहुत बढ़ गईं हैं। उसने कहा कि अफगानिस्तान में 25 लाख टन गेहूं की कमी है और देश की केवल 5% आबादी के पास खाने के लिए पर्याप्त राशन है।

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