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संयुक्त राष्ट्र महासभा में पाक पीएम के झूठ की उड़ीं धज्जियां

यूएन में भारत की फर्स्ट सेक्रटरी स्नेहा दुबे ने राइट टु रिप्लाई के तहत पाकिस्तान को सभी मुद्दों पर जमकर धोया।

यूएन में भारत की फर्स्ट सेक्रटरी स्नेहा दुबे ने पाकिस्तान को सभी मुद्दों पर जमकर धोया.

नई दिल्ली: संयुक्त राष्ट्र महासभा के 76वें सत्र में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने भाषण देते हुए कश्मीर का राग अलापा था। पाक पीएम ने कहा कि भारत में मुस्लिम दहशत के माहौल में हैं। उनके भाषण के बाद यूएन में भारत की फर्स्ट सेक्रटरी स्नेहा दुबे ने राइट टु रिप्लाई के तहत पाकिस्तान को सभी मुद्दों पर जमकर धोया। स्नेहा दुबे ने पाकिस्तान को न सिर्फ आतंकवाद और अल्पसंख्यकों की स्थिति पर आईना दिखाया, बल्कि उसे तत्काल कश्मीर में अपने अवैध कब्जे को खाली करने को भी कहा।

इमरान खान ने अपने भाषण में इस्लामोफोबिया, मॉब लिंचिंग, दिल्ली दंगे जैसे मुद्दे उठाकर यह माहौल बनाने  की कोशिश की थी कि भारत में अल्पसंख्यक असुरक्षित हैं। पाक पीएम ने कश्मीर में कथित मानवाधिकार उल्लंघन का रोना रोया था।  

भारत के खिलाफ लगातार झूठ फैला रहा पाक

यूएन में राइट टु रिप्लाई के तहत भारत की फर्स्ट सेक्रटरी स्नेहा दुबे ने कहा कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने भारत के आंतरिक मसलों को इस मंच पर उठाकर भारत की छवि को धूमिल करने की कोशिश की है। पाक वैश्विक मंचों पर भारत के खिलाफ लगातार झूठ फैला रहा है। दुर्भाग्य से यह कोई पहली बार नहीं हुआ है कि पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र की तरफ से मुहैया कराए गए इस प्लेटफॉर्म का दुरुपयोग भारत के खिलाफ झूठे और द्वेषपूर्ण दुष्प्रचार के लिए किया है। स्नेहा दुबे ने कहा कि पाकिस्तान में आतंकवादियों को फ्री पास मिला हुआ है और आम लोगों खासकर अल्पसंख्यकों की जिंदगी नरक बन गई है।

पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने यूएन में कश्मीर का मुद्दा उठाते हुए कहा था कि 5 अगस्त 2019 के बाद से भारत ने कश्मीर में कई तरह के 'गैरकानूनी' और 'एकतरफा' फैसले किए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि भारतीय फौज कश्मीरियों पर अत्याचार कर रही है और शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शनों को ताकत के दम पर दबा रही है। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव के हिसाब से कश्मीर में जनमत संग्रह कराए जाने की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि भारत कश्मीर में मानवाधिकारों का उल्लंघन कर रहा है।

 

राइट टु रिप्लाई के तहत भारतीय राजनयिक स्नेहा दुबे ने कहा कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हमेशा से भारत का अभिन्न हिस्सा रहा है। इसमें वे इलाके भी शामिल हैं जिन पर पाकिस्तान ने अवैध कब्जा किया हुआ है। हम पाकिस्तान से उनके अवैध कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर के हिस्से को फौरन खाली करने की मांग करते हैं।

इमरान ने खेला था विक्टिम कार्ड

यूएन के मंच पर इमरान खान ने पाकिस्तान को आतंकवाद से पीड़ित दिखाने की कोशिश की। तालिबान का बचाव करते हुए पाक पीएम ने दक्षिणपंथी चरमपंथियों और आतंकवादी समूहों की तरफ से मुस्लिमों को निशाना बनाए जाने के नए खतरे की बात की। इमरान खान ने सफाई दी कि अफगानिस्तान में पाकिस्तान का कोई रोल नहीं है। अफगानिस्तान के मौजूदा हालात से तो इस्लामाबाद खुद चिंतित है।

इस पर भारतीय राजनयिक स्नेहा दुबे ने कहा कि पाकिस्तान एक ऐसा देश है जो आग बुझाने वाले का वेष बनाकर आग लगाता है। पाकिस्तान ने अपने आंगन में आतंकवादियों को इस उम्मीद में पाला-पोसा कि वे सिर्फ उसके पड़ोसियों को नुकसान पहुंचाएंगे। उनकी नीतियों से हमारा क्षेत्र ही नहीं पूरी दुनिया पीड़ित हुई है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की तरफ से घोषित सबसे ज्यादा आतंकवादी पाकिस्तान में ही हैं।

स्नेहा दुबे ने कहा कि  '9/11 आतंकी हमले के 20 साल हो चुके हैं। दुनिया यह नहीं भूली है कि इस हमले का मास्टरमाइंड ओसामा बिन लादेन को पाकिस्तान में पनाह मिली थी। पाकिस्तानी नेतृत्व अब भी उसे एक शहीद के तौर पर ग्लोरीफाई करना जारी रखा है।

भारत के खिलाफ इमरान ने उगला था ज़हर

भारत के खिलाफ ज़हर उगलते हुए इमरान खान ने हिंदुत्व की विचारधारा को लेकर 'आरएसएस-बीजेपी' के खिलाफ भी बोला और कहा कि ये भारत के 20 करोड़ मुसलमानों पर हिंसा करते हैं। इमरान खान ने मॉब लिंचिंग, दिल्ली दंगे, सीएए का हवाला देते हुए कहा कि भारत में मुस्लिम दहशत के माहौल में हैं। 

पाक पीएम के इस दुष्प्रचार का स्नेहा दुबे ने करारा जवाब दिया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने बांग्लादेश में धार्मिक और सांस्कृतिक नरसंहार किया। आज पाकिस्तान के अल्पसंख्यक सिख, हिंदू और क्रिश्चियन लगातार डर के माहौल में जी रहे हैं। असहमति की आवाज को दबाया जा रहा है। वहीं दूसरी तरफ भारत एक बहुलतावादी लोकतंत्र है जहां अल्पसंख्यक राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, चीफ जस्टिस, सेना प्रमुख जैसे देश के सर्वोच्च पदों पर पहुंचे हैं। भारत में स्वतंत्र मीडिया और स्वतंत्र न्यायपालिका है जो हमारे संविधान पर नजर रखते हैं और उसकी रक्षा करते हैं। जबकि पाकिस्तान में संवैधानिक तौर पर कोई भी अल्पसंख्यकों को देश के उच्च पद पर नहीं पहुंच सकता ।

इमरान खान अपने पूरे भाषण के आधे से ज्यादा हिस्से में भारत को कोसते रहे लेकिन अंत में दोनों देशों के बीच बातचीत के लिए माहौल बनाने की जिम्मेदारी भारत पर छोड़ दिया। अब इमरान खान को कौन समझाए कि जब तक अफगानिस्तान में पाकिस्तान तालिबान सरकार को शह और कश्मीर में आतंकवादियों के जरिए घुसपैठ को बढ़ावा देता रहेगा तब तक दोनों देशों के रिश्ते सामान्य कैसे होंगे?  
 

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