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फ्रांस-अमेरिका विवाद: हथियार एक्सपोर्ट पर टिकी हैं तथाकथित मेजर इकोनॉमी

दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाएं हथियारों के निर्यात पर निर्भर हैं। स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) की एक रिपोर्ट के अनुसार दुनिया में हथियार बेचने वाली 100 सबसे बड़ी कंपनियों का सालाना कारोबार 2017 में 398.2 अरब डॉलर था।

हथियार एक्सपोर्ट पर टिकी हैं तथाकथित मेजर इकोनॉमी

नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति जो बिडेन ने ऑस्ट्रेलिया और ब्रिटेन के साथ एक इंडो-पैसिफिक गठबंधन की घोषणा की। जिसके कारण ऑस्ट्रेलिया ने अमेरिका की बनाई परमाणु पनडुब्बी खरीदने के लिए फ्रांस से पारंपरिक डीजल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बी खरीदने के एक बड़े सौदे को रद्द कर दिया। इसके बाद फ्रांस ने अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया से अपने राजदूतों को तुरंत वापस बुलाने का फैसला किया है। डीजल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बियों के एक सौदे के रद्द होने से फ्रांस को लगभग 100 अरब डॉलर का नुकसान उठाना पड़ा। फ्रांस ने ऑस्ट्रेलिया और यू.एस. दोनों की आलोचना करते हुए कहा कि यह वास्तव में पीठ में मारा गया एक छुरा है।

फ्रांस के एक रक्षा सौदे के रद्द होने के कारण इस हद तक नाराज होने के पीछे कुछ जायज कारण भी हैं। दुनिया की तथाकथित बड़ी अर्थव्यवस्थाएं बहुत हद तक हथियारों के निर्यात पर निर्भर हैं। स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) की एक रिपोर्ट के अनुसार दुनिया में हथियार बेचने वाली 100 सबसे बड़ी कंपनियों का सालाना कारोबार 2017 में 398.2 अरब डॉलर था। इन शीर्ष 100 कंपनियों में अमेरिका और पश्चिमी यूरोप में सूचीबद्ध कंपनियों की संख्या 66 है। इससे साफ है कि इन देशों की इकॉनोमी किस हद तक हथियारों की बिक्री पर निर्भर है।   

2016-20 के दौरान दुनिया के पांच सबसे बड़े हथियार निर्यातक देश अमेरिका,रूस, फ्रांस, जर्मनी और चीन थे। जबकि पांच सबसे बड़े हथियार आयातक देशों में सऊदी अरब, भारत, मिस्र, ऑस्ट्रेलिया और चीन शामिल थे। SIPRI ने 15 मार्च 2021 को दुनिया में हथियारों की बिक्री का डेटा अपनी वेबसाइट पर डाला है। जिसमें 1950 से 2020 तक दुनिया में हथियारों की बिक्री का डेटा दिया गया है।  

दुनिया के पांच सबसे बड़े हथियार निर्यातक देशों का हथियारों के निर्यात के 76 प्रतिशत हिस्से पर कब्जा है। इनमें से फ्रांस के हथियारों के निर्यात में सबसे अधिक वृद्धि हुई है। अमेरिका और जर्मनी के हथियारों के निर्यात में भी वृद्धि हुई है। जबकि रूसी और चीनी हथियारों के निर्यात में कमी आई है। दुनिया के सबसे बड़े 25 हथियार निर्यातकों ने 2016–20 के दौरान वैश्विक निर्यात के 99 प्रतिशत हिस्से पर कब्जा कर रखा था। केवल अमेरिका और यूरोप के देशों का ही हथियारों के निर्यात के 86 प्रतिशत हिस्से पर कब्जा है।   

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2016 से 2020 के बीच अमेरिकी हथियारों के निर्यात में 15 प्रतिशत की वृद्धि हुई। जिससे इसकी वैश्विक हिस्सेदारी 32 से बढ़कर 37 प्रतिशत हो गई। इसी दौरान रूस का कुल वैश्विक हथियारों के निर्यात में 20 प्रतिशत हिस्सा रहा। रूसी हथियारों का मुख्य आयातक भारत है। जो रूस के कुल निर्यात का 23 प्रतिशत खरीदता है। इसके बाद चीन (18 प्रतिशत) और अल्जीरिया (15 प्रतिशत) का स्थान है। फ्रांसीसी हथियारों के निर्यात में 2016–20 के बीच 44 प्रतिशत की वृद्धि हुई। जिससे कुल वैश्विक निर्यात में उसका हिस्सा 8.2 प्रतिशत हो गया।    

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