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तालिबान राज के 100 दिन, अंतर्राष्ट्रीय मान्यता अभी पहुंच से दूर

ईरान, पाकिस्तान, रूस, भारत और चीन ने अफगानिस्तान पर बैठकों का आयोजन किया है। जी-20 के साथ ही संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने भी अफगानिस्तान के मसले पर अलग-अलग चर्चा की है।

तालिबान के नेता

नई दिल्ली : अफगानिस्तान में अपने 100 दिन के शासन में तालिबान को एक सबक बहुत अच्छी तरह से पता चल गया है कि किसी के राज को उखाड़ फेंकना बहुत आसान है लेकिन उसके बाद व्यवस्थित शासन चलाना उतना ही कठिन है। इस्लामी आतंकवादी ग्रुप तालिबान अभी भी अंतर्राष्ट्रीय मान्यता हासिल करने से बहुत दूर है। मंगलवार को तालिबान के सत्ता में आने के 100 दिन पूरे हो गए। अपने नेता अमिर खान मुत्ताकी के नेतृत्व में अंतर्राष्ट्रीय मान्यता हासिल करने के लिए लगातार कूटनीतिक प्रयास करने के बावजूद अफगानिस्तान की नई सरकार को कुछ खास हासिल नहीं हुआ है।

गौरतलब है कि तालिबान की नई सरकार मौलवी हेब्तुल्लाह अखुंदजादा के नेतृत्व में अफगानिस्तान में इस्लामिक अमीरात कायम कर चुकी है। इस्लामिक अमीरात के नेता कई देशों की यात्रा कर चुके हैं और कई जगह बातचीत करने के इच्छुक भी हैं। तालिबान के नेता कई विदेशी सरकारों से संबंध कायम करने के लिए प्रयासरत रहें हैं। इसके बदले में कुछ देशों के प्रतिनिधियों ने अफगानिस्तान का दौरा किया है और उनके साथ बातचीत की है। अपने 100 दिन के शासन में तालिबान ने 6 महत्वपूर्ण क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय बैठकें अफगानिस्तान में आयोजित की हैं। 

ईरान, पाकिस्तान, रूस, भारत और चीन ने अफगानिस्तान पर बैठकों का आयोजन किया है। जी-20 देशों के नेता और उनके साथ ही संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने भी अफगानिस्तान के मसले पर अलग-अलग चर्चा की है। लेकिन तालिबान की उम्मीदों के खिलाफ अफगानिस्तान के इस्लामिक अमीरात को मान्यता देने पर इन बैठकों में कोई चर्चा नहीं की गई है। इन बैठकों में चर्चा का प्रमुख मुद्दा अफगानिस्तान में सामूहिक सरकार, मानव अधिकार, अभिव्यक्ति की आजादी और अफगान महिलाओं और लड़कियों के लिए शिक्षा और रोजगार का अधिकार रहा है। इसके साथ ही अफगानिस्तान की धरती को आतंकवादी गतिविधियों के प्रसार का अड्डा बनने से रोकने के मुद्दे पर भी चर्चा हुई।

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वैसे भी अपने पहले 100 दिनों के शासन के दौरान तालिबान ने अपने कुछ पड़ोसी देशों के साथ ही कूटनीतिक और विदेशी संबंध कायम करने की कोशिश की है। ज्यादातर अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को इस बात का इंतजार है कि तालिबान अपने पहले किए गए वादों को पूरा करे। फिलहाल तालिबान के लिए ये राहत भरी बात है कि अभी हाल में ईरान, पाकिस्तान, चीन, रूस, तुर्की, कतर, उज्बेकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, इटली और संयुक्त अरब अमीरात सहित 11 देशों ने अफगानिस्तान में अपने दूतावास खोल दिए हैं।

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