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यूपी में किसानों की मौत से जगी कांग्रेस को नई जिंदगी की आस

कांग्रेस के घाघ नेताओं के लिए ये समझना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन भी है कि नेहरू-गांधी परिवार का कोई वारिस राजनीति में जनता की तकलीफों को इतनी गंभीरता से ले सकता है।

प्रियंका गांधी की रिहाई के लिए प्रदर्शन करते कांग्रेस के कार्यकर्ता.

नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में किसानों और भाजपा के कार्यकर्ताओं के खूनी टकराव में 4 किसानों और 4 भाजपा समर्थकों की मौत से ज्यादातर लोगों को दुख हुआ। आम लोगों से भी ज्यादा दुख विपक्षी पार्टियों को हुआ। किसानों का दुख दूर करने के लिए सभी नेता लखीमपुर खीरी जाने के लिए बेताब हो गए। सभी अपने-अपने काफिले के साथ जनता के दुखहरण अभियान पर निकलने के लिए तैयार हो गए। अब यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ को ये बात कब मंजूर होने वाली थी कि उनके इलाके में विपक्षी दलों के नेता मसीहा बनने के धंधे में सफल हो जाएं।  

आनन-फानन में सरकारी अमला हरकत में आया। पुलिस को फरमान जारी हुआ और जो जहां था उसे वहीं दबोच लिया गया। यूपी के राजनीतिक अखाड़े में चलने वाले दांव-पेंच के माहिर अखिलेश यादव, मायावती और शिवपाल यादव ने थोड़ी बहुत नाटक-नौटंकी के बाद शांत रहना ही मुनासिब समझा। यूपी की राजनीति में अजमाए जाने वाले तौर-तरीकों से कुछ हद तक नावाकिफ प्रियंका गांधी अपने नौसिखियापन में अड़ गईं। कांग्रेस के पुराने घाघ नेता प्रियंका की इस नादानी पर चौंक गए। उनके लिए ये समझना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन भी था कि नेहरू-गांधी परिवार का कोई वारिस अब राजनीति में जनता की तकलीफों को इतनी गंभीरता से भी ले सकता है।  

                            लखनऊ एयरपोर्ट पर राहुल गांधी और कांग्रेस के नेता

अब इसमें किसी को कोई मुगालता नहीं होना चाहिए लखीमपुर खीरी जाने के लिए जेल जाने की हद तक जाकर प्रियंका ने यूपी में मुर्दा पड़ी कांग्रेस में कुछ जान फूंकने में सफलता हासिल की है। कहते हैं कि खरबूजे को देखकर खरबूजा रंग बदलता है।प्रियंका के तेवर देखकर राहुल गांधी को तो जोश आया ही, छत्तीसगढ़ और पंजाब के मुख्यमंत्री के तेवर भी गरम हो गए। काम-धंधा करके अपने-अपने घरों में आराम फरमा रहे कांग्रेसियों को भी लगा कि अपनी सनातन वफादारी को साबित करने का ये सही मौका है।   

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यूपी में 2020 में विधानसभा के चुनाव होने वाले हैं। सभी की निगाहें अर्जुन की तरह डाल पर बैठी सिंहासन की चिड़िया की आंख पर है। कांग्रेस को यूपी की सत्ता से बेदखल हुए 32 साल हो गए हैं। अब कांग्रेस को लगता है कि लखीमपुर खीरी की मारकाट से निकलती राह उसको लखनऊ की गद्दी तक पहुंचा सकती है। प्रियंका गांधी ने कांग्रेस के सुस्त पड़े जिस्म में हरकत तो पैदा कर दी है। अब देखना होगा कि वे इस मुर्दा पड़े संगठन को विपक्षियों से टक्कर लेने लायक बना पाती हैं या फिर अपने भाई राहुल गांधी की तरह नाकामी के दलदल में फंसती हैं। देखते जाइए तमाशा जारी है..       
 

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