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स्वामी प्रभुपाद की 125वीं जयंती के मौके पर पीएम मोदी लांच करेंगे 125 रुपये का सिक्का

इस्कॉन मंदिर ट्रस्ट की तरफ से दी गई जानकारी में बताया गया है कि इस कार्यक्रम में 60 से ज्यादा देशों से हजारों श्रद्धालु ऑनलाइन तौर पर जुटेंगे।

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 1 सितंबर को श्रीला भक्तिवेदांत स्वामी प्रभुपाद की 125वीं जयंती के अवसर पर 125 रुपये का विशेष स्मारक सिक्का जारी करेंगे। इसके अलावा पीएम मोदी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सभा को भी संबोधित करेंगे। पीएमओ की तरफ से जारी प्रेस रिलीज में इस बात की जानकारी दी गई है।

कार्यक्रम में ऑनलाइन जुटेंगे 60 देशों से श्रद्धालु

इस्कॉन मंदिर ट्रस्ट की तरफ से दी गई जानकारी में बताया गया है कि इस कार्यक्रम में 60 से ज्यादा देशों से हजारों श्रद्धालु ऑनलाइन तौर पर जुटेंगे। कार्यक्रम की शुरुआत में पश्चिम बंगाल के मायापुर में स्थित इस्कॉन विश्व विद्यालय के छात्र संस्कृत में प्रार्थना करेंगे। और प्रधानमंत्री का स्वागत करेंगे। इस्कॉन के राष्ट्रीय संचार निदेशक व्रजेंद्र नंदन दास ने कार्यक्रम में शामिल होने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारत सरकार का आभार जताया है। उन्होंने बताया कि कोलकाता की टकसाल में श्रील प्रभुपाद की 125वीं जयंती पर 125 रुपये का विशेष स्मारक सिक्का जारी किया जाएगा।

कौन थे स्वामी प्रभुपाद?

स्वामी प्रभुपाद ने इंटरनेशनल सोसाइटी फॉर कृष्णा कॉन्शसनेस (इस्कॉन) की स्थापना की थी, जिसे आमतौर पर ‘हरे कृष्ण आंदोलन’ के रूप में जाना जाता है। इस्कॉन ने श्रीमद भागवत गीता और अन्य वैदिक साहित्य का 89 भाषाओं में अनुवाद किया, जो दुनियाभर में वैदिक साहित्य के प्रसार में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। स्वामी प्रभुपाद ने 100 से अधिक मंदिरों की स्थापना भी की और दुनिया को भक्ति योग का मार्ग दिखाने वाली कई किताबें भी लिखीं।

स्वामी प्रभुपाद का शुरुआती जीवन

स्वामी प्रभुपाद का पूरा नाम ए.सी. भक्तिवेदांत स्वामी है। उनका जन्म 1 सितंबर 1986 को तत्कालीन कलकत्ता में हुआ था। साल 1922 में अपने गुरु से मिलने के बाद उन्होंने अंग्रेजी भाषा में भगवान श्रीकृष्ण की शिक्षाओं को पूरी दुनिया में प्रसारित करने का बीड़ उठा लिया। साल 1965 में वो पानी के जहाज पर सवार होकर संयुक्त राज्य अमेरिका की यात्रा पर निकले। उस समय स्वामी प्रभुपाद की उम्र 70 वर्ष थी। उन्होंने बोस्टन में पहली बार अमेरिकी धरती पर कदम रखा। अगले 12 वर्षों में उन्होंने दुनिया के अलग अलग हिस्सों में 108 मंदिरों की स्थापना की। उन्होंने दुनिया के सबसे बड़े शाकाहारी खाद्य सहायता कार्यक्रम की भी स्थापना की।

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