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शारदीय नवरात्र के दूसरे दिन करें मां ब्रह्मचारिणी की आराधना, कष्टों का होगा निवारण

माता दुर्गा के ब्रह्मचारिणी स्वरूप ने राजा हिमालय के घर जन्म लिया था। नारद जी की सलाह पर ब्रह्मचारिणी ने कठोर तपस्या किया, जिससे वे भोलेनाथ को पति स्वरूप में प्राप्त कर सकें।

नई दिल्लीः (भानु प्रकाश) आज शारदीय नवरात्रि का दूसरा दिन है । मां दुर्गा के दूसरे स्वरूप ब्रह्माचारिणी की पूजा-अर्चना की जाती है। मां ब्रह्मचारिणी की कृपा तप और शुद्ध आचरण करने वालों पर बरसती है। ब्रह्म का अर्थ होता है तपस्या और चारिणी का अर्थ होता है आचरण करनेवाला है । माता के इस स्वरुप से तप, त्याग, संयम और सदाचार की वृद्धि होती है । शास्त्रों में कहा गया है कि जिसकी चंद्रमा कमजोर होती है उसे मां ब्रह्मचारिणी की आराधना करनी चाहिए ।

मां ब्रह्मचारिणी की उपासना के वक्त पीले अथवा सफेद वस्त्र धारण करना चाहिए। मां को सफेद वस्तुएं अर्पित करें जैसे कि मिश्री, शक्कर या पंचामृत। माता ब्रह्मचारिणी के लिए "ॐ ऐं नमः" का जाप करें। फलाहार आहार और जल पर विशेष ध्यान देना चाहिए।  मां ब्रह्मचारिणी की पूजा करने से व्यक्ति को अपने कार्य में सदैव विजय प्राप्त होता है। मां ब्रह्मचारिणी दुष्टों से छुटकारा दिलाती  हैं।

माता दुर्गा के ब्रह्मचारिणी स्वरूप ने राजा हिमालय के घर जन्म लिया था। नारद जी की सलाह पर ब्रह्मचारिणी ने कठोर तपस्या किया, जिससे वे भोलेनाथ को पति स्वरूप में प्राप्त कर सकें। कठोर तप के कारण उनका ब्रह्मचारिणी या तपश्चारिणी नाम पड़ा। भगवान शिव की आराधना के दौरान उन्होंने एक हजार साल तक केवल फल-मूल खाए तथा सौ साल तक शाक खाकर जीवित रहीं। कठोर तप  की वजह से उनका शरीर दुर्बल हो गया।

पूजन-मंत्र
दधाना करपद्माभ्यामक्षमालाकमण्डलु। देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा ।।

ब्रह्मचारिणी का ध्यान-मंत्र

वन्दे वांछित लाभायचन्द्रार्घकृतशेखराम्।
जपमालाकमण्डलु धराब्रह्मचारिणी शुभाम्॥

गौरवर्णा स्वाधिष्ठानस्थिता द्वितीय दुर्गा त्रिनेत्राम।
धवल परिधाना ब्रह्मरूपा पुष्पालंकार भूषिताम्॥

परम वंदना पल्लवराधरां कांत कपोला पीन।
पयोधराम् कमनीया लावणयं स्मेरमुखी निम्ननाभि नितम्बनीम्॥

नवरात्रि के दूसरे दिन माता की पूजन करें और उन्हें पान, सुपारी और लौंग चढ़ाएं। साथ ही  माता के मंत्रों का जाप और आरती करें। श्रद्धा भाव से मां ब्रह्मचारिणी की पूजा करने से ज्ञान की प्राप्ति होती है।  भक्तों की सभी कष्टों का निवारण और मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

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