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शारदीय नवरात्रि का पहला दिन, माता शैलपुत्री की पूजा से पूरी होगी मनोकामना

हिंदू पांचांग के अनुसार हर साल आश्विन मास के शुक्ल पक्ष के पहले दिन से शारदीय नवरात्रि की शुरुआत होती है। जिसमें 9 दिनों तक देवी दुर्गा के अलग-अलग रूपों की पूजा की जाती है।

माता शैलपुत्री

नई दिल्ली: आज शारदीय नवरात्रि का पहला दिन है। हर तरफ मां दुर्गा के जयकारे लग रहे हैं। मंदिरों में देवी मां के दर्शन के लिए लंबी कतार लगी हुई है। शारदीय नवरात्रि आज से शुरू हो रहा है, जो 14 अक्टूबर को खत्म होगा। फिर 15 अक्टूबर को विजयदशमी यानी दशहरा मनाया जाएगा। हिंदू पांचांग के अनुसार हर साल आश्विन मास के शुक्ल पक्ष के पहले दिन से शारदीय नवरात्रि की शुरुआत होती है। जिसमें 9 दिनों तक देवी दुर्गा के अलग-अलग रूपों की पूजा की जाती है। लेकिन इस साल आठ दिन मां दुर्गा की पूजा होगी।

माता दुर्गा के नौ स्वरूप हैं। इनकी पूजा नवरात्रि में होती है। दुर्गा सप्तशती के देवी कवच स्रोत में माता के नौ स्वरुपों को इस प्रकार बताया गया है-
प्रथमं शैलपुत्री च द्वितीयं ब्रह्मचारिणी।
तृतीयं चन्द्रघण्टेति कूष्माण्डेति चतुर्थकम् ।।
पंचमं स्कन्दमातेति षष्ठं कात्यायनीति च।
सप्तमं कालरात्रीति महागौरीति चाष्टमम् ।।
नवमं सिद्धिदात्री च नवदुर्गा: प्रकीर्तिता:।
उक्तान्येतानि नामानि ब्रह्मणैव महात्मना ।। [

नवरात्र के पहले दिन में दुर्गा के पहले स्वरूप माता शैलपुत्री की पूजा की जाती है। शैलपुत्री के पूजन का मंत्र है....
शैलपुत्री का मंत्र
ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डाय विच्चे ॐ शैलपुत्री देव्यै नम:।
ध्यान मंत्र
वन्दे वांच्छित लाभाय चंद्रार्धकृतशेखराम्‌ । 
वृषारूढ़ां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्‌ ॥

माता शैलीपुत्री हिमालय की पुत्री हैं। इसी वजह से मां के इस स्वरूप को शैलपुत्री कहा जाता है। सफेद वस्त्र धारण किए मां शैलपुत्री के दाहिने हाथ में त्रिशूल और बाएं हाथ में कमल शोभायमान है। मां के माथे पर चंद्रमा सुशोभित है। वे नंदी बैल पर सवार संपूर्ण हिमालय पर विराजमान हैं। शैलपुत्री मां को वृषोरूढ़ा और उमा के नामों से भी जाना जाता है। इनकी आराधना से हमें सभी मनोवांछित फलों की प्राप्ति होती है। मां शैलपुत्री का प्रसन्न करने के लिए ध्यान मंत्र जपना चाहिए। श्रद्धा भक्ति से पूजन से मां सभी मनोकामनाओं को पूर्ण करती हैं।

पूरे देश में नवरात्रि का त्योहार बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है। कुछ लोग दुर्गासप्तशती और दुर्गा चालीसा का पाठ करते हैं और कलश स्थापना कर अखंड दीप जलाते हैं। पूरी नवरात्रि में श्रद्धालु, मां दुर्गा के प्रति अगाध आस्था  रखते हुए  मां की आराधना करते हैं और  पूरे 9 दिनों का उपवास रखते हैं। अष्टमी को व्रती छोटी कन्याओं की पूजा करते हैं। नवमी को हवन करके भक्त पूर्णाहुति करते हैं।

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शास्त्रों में चार नवरात्रि बताई गई हैं। दो नवरात्रि बड़े स्तर पर मनाई जाती हैं और दो गुप्त रूप से साधु-संतों के लिए होती हैं। गुप्त नवरात्रि में मां दुर्गा की दस महाविद्याओं की साधना की जाती है। मान्यताओं के अनुसार गुप्त नवरात्रि में की जाने वाली पूजा से सभी कष्टों से मुक्ति मिलती है। लेकिन सभी नवरात्रियों में से शारदीय और चैत्र नवरात्रि का महत्व सबसे अधिक होता है।

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