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नवरात्रि में आज हो रही है मां कालरात्रि की आराधना , कष्टों का निवारण करती है मां कालरत्रि

आज सप्तमी की पूजा चल रही है। सप्तमी तिथि नवरात्रि में मां कालरात्रि को समर्पित है। इस दिन मां कालरात्रि की पूजा करने से जीवन में आने वाली परेशानियां दूर होती हैं।

मां कालरात्रि

नई दिल्ली, (भानु प्रकाश) : नवरात्रि का पावन पर्व चल रहा है। आज सप्तमी की पूजा चल रही है। सप्तमी तिथि नवरात्रि में मां कालरात्रि को समर्पित है। इस दिन मां कालरात्रि की पूजा करने से जीवन में आने वाली परेशानियां दूर होती हैं। आज दुर्गा पंडाल में मां की आंख खुल जाती है और श्रद्धालु माता के दर्शन के लिए पंडाल तक पहुंचते हैं ।

कालरात्रि की पूजा का महत्व

मां कालरात्रि को संकटों और विघ्न को दूर करने वाली देवी माना गया है। इसके साथ ही मां कालरात्रि को शत्रु और दुष्टों का संहार करने वाला भी बताया गया है। नवरात्रि में मां कालरात्रि की पूजा करने से तनाव, अज्ञात भय और नकारात्मक ऊर्जा से मुक्ति मिलती है।

 

 

पीएम मोदी ने मां कालरात्रि से देशवासियों के लिए की प्रार्थना

पीएम मोदी देश वासियों के लिए मां कालरात्रि से प्रार्थना की और देश वासियों को के लिए मां से उनकी सारी बाधाओं को दूर करने की प्रार्थना की। पीएम मोदी ने ट्विटर पर लिखा, मां कालरात्रि से प्रार्थना है कि सारी बाधाओं को दूर कर वे हर किसी के जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और उत्तम स्वास्थ्य लेकर आएं।

मां कालरात्रि का स्वरूप

मां कालरात्रि का रंग कृष्ण वर्ण है. कृष्ण वर्ण की वजह से माता को कालरात्रि कहा जाता है। मां कालरात्रि की 4 भुजाएं हैं। पौराणिक कथा के अनुसार असुरों के राजा रक्तबीज का संहार करने के लिए दुर्गा मां ने मां कालरात्रि का रूप लिया था।

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मां कालरात्रि पूजन की  विधि

आश्विन शुक्ल पक्ष की सप्तमी की स्नान करने के बाद पूजा आरंभ करनी चाहिए। माता कालरात्रि की पूजा में अनुशासन और स्वच्छता के नियमों का विशेष पालन करना चाहिए। मां कालरात्रि की पूजा में मिष्ठान, पंच मेवा, पांच प्रकार के फल,अक्षत, धूप, गंध, पुष्प और गुड़ नैवेद्य आदि का अर्पण किया जाता है. इस दिन गुड़ का विशेष महत्व बताया गया है। मां कालरात्रि को लाल रंग प्रिय है।

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मां कालरात्रि का ध्यान मंत्र

करालवंदना धोरां मुक्तकेशी चतुर्भुजाम्।
कालरात्रिं करालिंका दिव्यां विद्युतमाला विभूषिताम॥

दिव्यं लौहवज्र खड्ग वामोघो‌र्ध्व कराम्बुजाम्।
अभयं वरदां चैव दक्षिणोध्वाघ: पार्णिकाम् मम॥

महामेघ प्रभां श्यामां तक्षा चैव गर्दभारूढ़ा।
घोरदंश कारालास्यां पीनोन्नत पयोधराम्॥

सुख पप्रसन्न वदना स्मेरान्न सरोरूहाम्।
एवं सचियन्तयेत् कालरात्रिं सर्वकाम् समृद्धिदाम्

या देवी सर्वभू‍तेषु माँ कालरात्रि रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।

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मां कालरात्रि का पूजन मंत्र

एक वेधी जपाकर्णपूरा नग्ना खरास्थिता।
लम्बोष्ठी कर्णिकाकणी तैलाभ्यक्तशरीरिणी।।

वामपदोल्लसल्लोहलताकण्टक भूषणा।
वर्धनमूर्धध्वजा कृष्णा कालरात्रिर्भयंकरी।।

देवी कालरात्रि के कवच-

ऊँ क्लीं मे हृदयं पातु पादौ श्रीकालरात्रि।
ललाटे सततं पातु तुष्टग्रह निवारिणी॥

रसनां पातु कौमारी, भैरवी चक्षुषोर्भम।
कटौ पृष्ठे महेशानी, कर्णोशंकरभामिनी॥

वर्जितानी तु स्थानाभि यानि च कवचेन हि।
तानि सर्वाणि मे देवीसततंपातु स्तम्भिनी॥

मां कालरात्रि की पूजा से कष्ट का निवारण होता है । शारदीय नवरात्रि के सप्तमी को मां की पूजा को बड़ा ही शुभ माना गया है ।

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