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ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका का फॉर्मूला चुराकर रूस ने बनाई स्पुतनिक-V वैक्सीन!

एक तरफ ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका ने कोरोना वैक्सीन बनाने की घोषणा की और कहा कि वो इंसानों पर ट्रायल शुरू करने वाले हैं, तो दूसरी तरफ महीने भर के भीतर ही रूस ने स्पुतनिक-वी वैक्सीन...

फाइल फोटो

लंदन: जब दुनिया कोरोना महामारी से कराह रही थी, तो वैक्सीन बनाने की कोशिश हर तरफ हो रही थी। कई बड़ी रिसर्च कंपनियों ने कहा था कि वो कोरोना की वैक्सीन बना रहे हैं, इनमें से एक नाम था एस्ट्राजेनेका का। जो यूके की ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के साथ मिलकर कोरोना की वैक्सीन बना रही थी। एक तरफ ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका ने कोरोना वैक्सीन बनाने की घोषणा की और कहा कि वो इंसानों पर ट्रायल शुरू करने वाले हैं, तो दूसरी तरफ महीने भर के भीतर ही रूस ने स्पुतनिक-वी वैक्सीन न सिर्फ बनाने की घोषणा कर दी, बल्कि ये भी दावा कर दिया कि इसका परीक्षण सफल रहा है। इस तरह से रूस ने कोरोना वैक्सीन के मामले में दुनिया भर में पहला देश होने का दावा कर दिया। हालांकि अब खबरें आ रही हैं कि ये सब छलावा था। क्योंकि रूस ने वैक्सीन भले ही बनाई थी, लेकिन वो चोरी की थी। जी हां, यूके के डेलीमेल अखबार ने इसका खुलासा किया है। 

रूस ने साइबर अटैक का भी लिया सहारा

डेलीमेल ने बताया है कि ऑक्सफोर्ड की बनाई वैक्सीन का ब्लू-प्रिंट रूसी एजेंट्स ने चुरा लिया था। यही नहीं, उन्होंने बाकायदा इसकी खुराक भी हासिल कर ली थी और इसके लिए उन्होंने बड़े साइबर हमलों का भी सहारा लिया था। सूत्रों के हवाले से बताया जा रहा है कि यूके में घुसकर रूसी एजेंट्स ने इस दुस्साहसिक कार्रवाई को अंजाम दिया। इस दावे पर जोर देने के लिए डेलीमेल ने बताया है कि ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका की कोविशील्ड और रूसी वैक्सीन स्पुतनिक-वी एक ही तरह से काम करती हैं। इसके अलावा बताया जा रहा है कि रूस ने ऑक्सफोर्ड के वैक्सीन बनाने के बाद अचानक से ही वैक्सीन बनाने में सफलता हासिल करने की घोषणा की। उस समय ऑक्सफोर्ड भयंकर तरीके से साइबर अटैक की जद में था। इस बात की पुष्टि यूके की शीर्ष खुफिया एजेंसी एमआई 5 ने भी की है। MI5 जासूस पहले ही कह चुके हैं कि ब्रिटिश वैज्ञानिकों द्वारा एक वैक्सीन विकसित करने की घोषणा के लगभग एक महीने बाद रूसी हैकर्स ने मार्च 2020 से ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी पर साइबर हमलों को अंजाम देने की बार-बार कोशिश की थी।

सरकार बचा रही है अपनी जान

गृह कार्यालय मंत्री डेमियन हिंड्स ने कहा कि वह इस मामले पर टिप्पणी नहीं कर सकते लेकिन इससे इनकार भी नहीं किया जा सकता है। उन्होंने कहा, 'यह मानना ​​​​उचित है कि निश्चित रूप से विदेशी ताकतें लगातार वाणिज्यिक, संवेदनशील, वैज्ञानिक रहस्य और बौद्धिक संपदा को हथियाने की कोशिश में जुटी हुई है।' डेली मेल ने एक अन्य अखबार द सन के हवाले से बताया है कि सुरक्षा सूत्रों की तरफ से ब्रिटिश मंत्रियों को बताया गया है कि उनके पास इस बात के सबूत हैं कि क्रेमलिन के लिए काम करने वाले जासूसों ने अपनी खुद की वैक्सीन डिजाइन करने के लिए बहुराष्ट्रीय दवा कंपनी से कोविड जैब का ब्लूप्रिंट चुराया था।

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