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फ्री स्पीच का गला घोंटने के लिए चीन ने कसी कमर, मीडिया में निवेश पर लगाई रोक

चीन की शी जिनपिंग की सरकार ने देश में मीडिया के सेक्टर में निजी निवेश पर रोक लगा दी है और मीडिया में निवेश को प्रतिबंधित सूची में डाल दिया है।

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग

नई दिल्ली: (सरफराज़ सैफ़ी) चीन कम्युनिस्ट सरकार ने फ्री स्पीच का गला घोंटने के लिए कमर कस ली है। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की सरकार ने देश में मीडिया के सेक्टर में निजी निवेश पर रोक लगा दी है और मीडिया में निवेश को प्रतिबंधित सूची में डाल दिया है। चीन की कम्युनिस्ट पार्टी (CCP) की वेबसाइट पर कहा गया है कि स्टेट डेवलपमेंट एंड रिफार्म कमीशन (SDRC)  ने कहा कि पब्लिक ओपीनियन को ठीक रखने के लिए मीडिया संगठनों में निजी निवेश को प्रतिबंधित सूची में रखा गया है। 

चीन की कम्युनिस्ट सरकार मीडिया पर अपना कंट्रोल सुनिश्चित करना चाहती है। इसके लिए मीडिया संगठनों पर लगाम कसना जरूरी है। चीन की कम्युनिस्ट सरकार ये नहीं चाहती कि उसकी मर्जी के बगैर कोई भी मीडिया संस्थान को नियंत्रित करने की स्थिति में आ सके। देश के हर क्षेत्र में अपना कठोर नियंत्रण रखने वाली सरकार ने मीडिया को नियंत्रित करने के लिए पहले से जो नियम बनाए थे, नया नियम उनकी ही अगली कड़ी है। 

सरकारी आदेश में कहा गया है कि समाचार जुटाने, संपादन और ब्रॉडकास्टिंग से जुड़े किसी भी संस्थान में निजी निवेश नहीं किया जा सकेगा। आदेश में साफ कहा गया है कि अखबार, न्यूज एजेंसी, टीवी ब्रॉडकास्टिंग, ऑनलाइन वेबसाइट और रेडियो पर ये नियम लागू होगा। मीडिया के अलावा चीन ने राजनीतिक, आर्थिक, सैनिक और कूटनीतिक संगठनों में भी निजी निवेश को प्रतिबंधित सूची में शामिल कर दिया है।  

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अपने देश में मीडिया पर कड़े नियम लगाने वाला चीन इसके विपरीत दूसरे देशों में मीडिया पर अपना प्रभाव बढ़ाने के लिए कई तरह के हथकंडे अपना रहा है। जिसमें विदेशी मीडिया में निवेश उसका सबसे बड़ा हथियार बनकर उभरा है। ऐसा करके चीन दुनिया में छवि को सुधारने की कोशिश कर रहा है।

चीन इसके लिए विदेशों में बुद्धजीवियों, पत्रकारों और विशेषज्ञों पर भारी रकम खर्च कर रहा है। अपने देश में मीडिया पर रोक लगाने के साथ ही चीन दूसरे देशों में चीनी मूल के प्रवासियों पर भी प्रभाव जमाने में लगा है। उसका उद्देश्य दुनिया में अपनी ताकत को बढ़ाने के साथ ही छवि को भी साफ करना है। जिससे चीन पर लगने वाले मानवाधिकारों उल्लंघन के आरोपों को खत्म किया जा सके।    
  

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