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J&K पुलिस की बड़ी कार्रवाई LeT, JeM और TRF के 900 से अधिक कार्यकर्ता गिरफ्तार

रविवार को जम्मू-कश्मीर पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए लश्कर-ए-तैयबा (LeT), जैश-ए-मोहम्मद (JeM), और द रेसिस्टेंस फ्रंट (TRF) के 900 से अधिक कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार कर लिया।

सांकेतिक चित्र

जम्मू कश्मीर में आतंकियों द्वारा बीते कुछ ही दिनों में अल्पसंख्यक समुदाय के लगभग 25 लोगों की हत्याएं कर दी गई। इसके बाद केंद्र सरकार हरकत में आई और गृहमंत्री अमित शाह ने दिल्ली से एक स्पेशल टीम जम्मू-कश्मीर भेजी। जिसके बाद रविवार को जम्मू-कश्मीर पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए लश्कर-ए-तैयबा (LeT), जैश-ए-मोहम्मद (JeM), अल-बद्र और द रेसिस्टेंस फ्रंट (TRF) के 900 से अधिक ओवर-ग्राउंड वर्कर्स (OGW) को गिरफ्तार किया है। जम्मू-कश्मीर पुलिस ने पहले इन लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की फिर इन्हें गिरफ्तार किया। मीडिया सूत्रों की मानें तो कश्मीर में पिछले कुछ दिनों के दौरान हुए हमलों के बाद प्रशासन की अब तक की ये सबसे बड़ी कार्रवाई है। 

मीडिया सूत्रों ने बताया कि गिरफ्तार किए गए लोगों से कई एजेंसियां पूछताछ में लगी हुई हैं। एजेंसियां इन गिरफ्तार किए गए OGW से यह बात जानना चाहती है कि ये लोग आखिरकार जम्मू-कश्मीर के अल्पसंख्यक समुदायों को ही निशाना क्यों बना रहे हैं। आपको बता दें कि घाटी में कश्मीरी पंडित व्यवसायी माखन लाल बिंदरू और दो अन्य नागरिकों की मौत की जिम्मेदारी आतंकी संगठन टीआरएफ प्रमुख ने ली है। पिछले दिनों आतंकियों ने 68 वर्षीय बिंदरू की उस समय हत्या कर दी थी जब वह अपनी फार्मेसी में थे। इसके बाद आतंकियों ने लाल बाजार इलाके में गोलगप्पा बेचने वाले विरेंद्र पासवान की हत्या कर दी थी। विरेंद्र पासवान बिहार के भागलपुर के रहने वाले थे। इसके बाद इन आतंकियों ने बांदीपोरा के शाहगुंड इलाके में एक आम नागरिक की हत्या कर दी थी। 

जम्मू-कश्मीर में निशाने पर अल्पसंख्यक

ये मामले दिखने में तो धार्मिक आतंकवाद की सी लगती हैं। लेकिन इन सबके पीछे आर्थिक कारण अधिक अहम हैं। हमारी पड़ताल में ये बात समझ में आती है कि पिछले कुछ समय से जो हत्याएं हो रही हैं, वो हत्याएं उन लोगों की हो रही हैं, जो दशकों से आतंकवाद का सामना करते हुए कश्मीर में डटे रहे। इसमें माखनलाल बिंदरू भी थे, जो आतंकवाद के खिलाफ डटे रहे और लोगों की मदद करते रहे। वो एक केमिस्ट थे, जो अपनी दवाइयों के माध्यम से लोगों की जान बचाते थे। दूसरी बड़ी वारदात में श्रीनगर में आतंकियों ने ईदगाह इलाके में स्थित एक स्कूल में हमला कर दिया। इस हमले में स्कूल के प्रिंसिपल और टीचर की मौत हो गई है। दोनों ही गैर मुस्लिम थे। दीपक हिंदू और सुखविंदर कौर सिख समुदाय से ताल्लुक रखते हैं। ऐसे में इस बात को लेकर भी चिंता जताई जा रही है कि आखिर घाटी में गैर-मुस्लिम कितने सुरक्षित हैं।

हिंदुओं-सिखों की हत्या के पीछे की वजह क्या है?

कश्मीर में 1990 के शुरुआती समय में हिंदुओं, सिखों पर जमकर अत्याचार हुए। लाखों लोग विस्थापित हुए। उनकी संपत्तियां अब भी कश्मीर में है। केंद्र सरकार लगातार उनकी वापसी के प्रयास कर रही है। अलग खास गलियारों में उनको बसाने की योजनाएं चल रही हैं, लेकिन इन सबके बावजूद वो अपने पैतृक घरों की तरफ रूख नहीं कर पा रहे हैं। बताया ये जा रहा है कि कश्मीर से जिंदगी बचाने की जद्दोजहद में जिन लोगों ने अपना सबकुछ वहीं छोड़ दिया था, उनपर उनके पड़ोसियों, स्थानीय दबंग नेताओं के कब्जे हो गए। कुछ लोगों ने अपनी खेती-बाड़ी इस शर्त पर पड़ोसियों को दे दी थी, कि उससे मिली उपज या कमाई का एक हिस्सा वो हिंदू, सिख मालिक को देते रहेंगे। लेकिन बाद में वही लोग इन चीजों से पलट गए। अब सरकार की कोशिश है कि ऐसी संपत्तियों का बकाया भी वो संपत्ति के कब्जेदारों से वसूले। वहीं, घाटी के 4 जिलों में कम से कम 5,000 मामले जमीनों पर अवैध से कब्जे से भी जुड़े हैं। 

संपत्ति, पैसा है इन हत्याओं की वजह?

कश्मीर में अगर कश्मीरी पंडित, विस्थापित सिख अगर वापस आ जाते हैं। तो उसके बाद उनकी जमीनों पर हुए कब्जों को लौटाना पड़ेगा। घरों को खाली करना पड़ेगा। पिछले 30 साल की कमाई को बांटना और फिर उसे वापस करना पड़ेगा। ऐसे में अब आतंकवादियों की कोशिश है कि वो हिंदुओं, सिखों को निशाना बनाएं, ताकि आतंकवाद, कश्मीरियत के नाम लड़ाई के बहाने वो लोगों की वापसी को रोक सकें और संपत्तियों पर कब्जे उनके बने रहे। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, करीब 62 हजार परिवार रिफ्यूजी के तौर दिल्ली-जम्मू में पंजीकृत हैं। ऐसे परिवारों के 5000 से ज्यादा बड़ी संपत्तियों पर लोग कब्जा कर चुके हैं। कई संपत्तियों की तो शिकायतें तक नहीं दर्ज हो पाई। ऐसे में हम इन हत्याओं को धर्म, राज्य, कश्मीरियत, आजादी के नाम पर हुई हत्याओं में न ही गिनें, तो बेहतर होगा। क्योंकि इन हत्याओं के पीछे एक बड़ा मकसद है और वो मकसद है संपत्ति, धन, सामान और पैसा।

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