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दिल्ली में हो सकता है बिजली का संकट, रुक सकती है राजधानी की रफ्तार

दिल्ली के ऊर्जा मंत्री सत्येंद्र जैन ने कहा है कि दिल्ली को जिन प्लांट से बिजली आती है, उनमें 1 दिन का कोयले का स्टॉक बचा है। इससे दिल्ली की रफ्तार पर ब्रेक लग सकता है।

कोयला

नई दिल्ली : दिल्ली सरकार में ऊर्जा मंत्री सत्येंद्र जैन ने कहा है कि पूरे देश में कोयले से चलने वाले पावर प्लांट में कोयले की बहुत कमी है। दिल्ली को जिन प्लांट से बिजली आती है, उनमें 1 दिन का स्टॉक बचा है, कोयला बिल्कुल नहीं है। जैन ने केंद्र सरकार से अपील की है कि रेलवे वैगन का इस्तेमाल कर कोयला जल्द पहुंचाया जाए। अगर जैन की आशंका सही साबित होती है तो देश की राजधानी दिल्ली की रफ्तार पर ब्रेक लग सकता है। बिजली की कमी से दिल्ली में संकट खड़ा हो सकता है। 

दरअसल पूरी दुनिया में इस समय कोयले का स्टॉक बहुत कम है। इसके कारण इंटरनेशनल मार्केट में कोयले के दाम बहुत बढ़ गए हैं। भारत अपनी कोयले की मांग का लगभग तीन-चौथाई स्थानीय उत्पादन से पूरा करता है। लेकिन भारी बारिश से कोयला खदानों और प्रमुख परिवहन मार्गों पर पानी भर गया है। इससे कोयले से चलने वाले पॉवर स्टेशनों के संचालकों के सामने एक दुविधा खड़ी हो गई है। या तो वे किसी भी स्थानीय तौर पर उपलब्ध कोयले को घरेलू नीलामी में महंगे दाम पर खरीदें या विदेशों के कोयला बाजार में खरीदारी करें। जहां कीमतें पहले ही रिकॉर्ड उच्चतम स्तर पर पहुंच गई हैं। 

 

आयातित कोयले की कीमतें आसमान छू रही हैं, जबकि घरेलू कोयले पर चलने वाले संयंत्रों पर बहुत ज्यादा भार पड़ा है। बारिश कम होने के साथ हालात में सुधार होने की उम्मीद है। ग्राहकों पर कीमतों पर असर कुछ महीने बाद दिखाई देगा, जब बिजली वितरण कंपनियों को लागत निकालने के लिए नियामक से दाम बढ़ाने की मंजूरी मिल जाएगी।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार भारत के बिजली संयंत्रों में कोयले का भंडार सितंबर के अंत में गिरकर लगभग केवल 8.1 मिलियन टन रह गया, जो एक साल पहले की तुलना में लगभग 76 फीसद कम है। इंडियन एनर्जी एक्सचेंज लिमिटेड में औसत हाजिर बिजली की कीमतें सितंबर में 63% से ज्यादा बढ़कर 4.4 रुपये प्रति किलोवाट घंटे हो गईं। 

ये दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था की राह को रोकने की दिशा में एक बड़ा खतरा है। देश में कोयले से लगभग 70 फीसद बिजली का उत्पादन होता है। इसके कारण बिजली की स्पॉट कीमत की दरों में वृद्धि हुई है। जबकि एल्यूमीनियम स्मेल्टर और स्टील मिलों सहित बिजली के प्रमुख ग्राहकों की आपूर्ति में कटौती की जा रही है।

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उल्लेखनीय है कि कोयले से चलने वाले देश के पॉवर स्टेशनों के पास पिछले महीने के अंत से कोयले का औसतन चार दिनों का स्टॉक है। ये पिछले कई साल में सबसे कम है और अगस्त की शुरुआत में औसतन 13 दिनों के स्टॉक से काफी कम है। इसके कारण आधे से ज्यादा पॉवर प्लांट बंद होने को लेकर अलर्ट पर हैं। भारत में कोयले की आपूर्ति की भारी गिरावट के कारण पॉवर हाउसों पर बिगड़ता दबाव एक बड़े बिजली संकट को जन्म दे रहा है।

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